भूला नहीं हूँ वो शहादतें बस वक़्त मतलबी हो गया
दीवारों पर गोलियों के निशानों को भरा नहीं गया
चीखती रही वो आत्माएं जो मासूम थीं
आज फिर एक आंदोलन किसी राजनेता का वोट बैंक बन गया।
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